S

Sanjeevni Pathshala

Loading

Loading Sanjeevni Pathshala
All stories

Sanjeevni Pathshala·Parent Guide·16 August 2026

हर बच्चा अलग है

हर बच्चे की अपनी क्षमता, प्रतिभा और गति होती है।

एक छोटे से गाँव में तीन बहुत अच्छे दोस्त रहते थे—आरव, मीरा और कबीर।

आरव को किताबों और गणित से प्यार था। वह हर परीक्षा में पहले नंबर पर आता था। मीरा को रंग, चित्रकारी और मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने का शौक था, जबकि कबीर दिन-रात खेल के मैदान में दौड़ता और फुटबॉल के पीछे भागता था।

एक दिन गाँव में वार्षिक उत्सव हुआ, जहाँ शहर से एक बड़े विद्वान आए थे। उन्होंने सभी बच्चों और उनके माता-पिता को बुलाया और कहा, "आज हम बच्चों की परीक्षा लेंगे, और जो सबसे श्रेष्ठ होगा, उसे बड़ा पुरस्कार मिलेगा।"

आरव के पिता मुस्कुराए, उन्हें पूरा विश्वास था कि उनका बेटा ही जीतेगा। वहीं मीरा और कबीर के माता-पिता थोड़े चिंतित हो गए। वे अक्सर सोचते थे कि उनका बच्चा आरव की तरह पढ़ने में तेज़ क्यों नहीं है।

विद्वान ने मंच पर तीन अलग-अलग चुनौतियाँ रखीं:

पहला कार्य: गणित का एक कठिन प्रश्न हल करना।

दूसरा कार्य: गाँव की सुंदर प्राकृतिक छटा का चित्र बनाना।

तीसरा कार्य: एक ऊँचे पेड़ पर चढ़कर सबसे ऊपर बँधी घंटी बजाना।

परिणाम क्या हुआ?

जब गणित का प्रश्न आया, तो आरव ने चुटकियों में उसे हल कर दिया। मीरा और कबीर देखते रह गए। आरव के पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

जब चित्र बनाने की बारी आई, तो मीरा ने अपने रंगों से इतना जीवंत और खूबसूरत चित्र बनाया कि सब देखते रह गए। आरव और कबीर से सही से ब्रश भी नहीं पकड़ा गया।

जब पेड़ पर चढ़ने की बात आई, तो कबीर एक गिलहरी की तरह तेज़ी से सरकते हुए ऊपर चढ़ गया और घंटी बजा दी। आरव और मीरा पेड़ की छाल भी नहीं पकड़ पाए।

कार्यक्रम के अंत में विद्वान ने तीनों बच्चों को मंच पर बुलाया और तीनों को एक जैसा पुरस्कार दिया।

आरव के पिता ने टोकते हुए पूछा, "श्रीमान! गणित तो सिर्फ़ मेरे बेटे ने सही किया, फिर तीनों को एक समान पुरस्कार क्यों?"

विद्वान ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा, "अभिभावक जी, अगर हम मछली की योग्यता का अंदाज़ा उसके पेड़ पर चढ़ने की क्षमता से लगाएँगे, तो वह पूरी जिंदगी खुद को मूर्ख ही समझेगी। मछली पानी में तैरने के लिए बनी है, पक्षी आसमान में उड़ने के लिए, और चीता ज़मीन पर दौड़ने के लिए।"

उन्होंने आगे कहा:

"आरव का दिमाग़ गणित में चलता है, मीरा की उँगलियों में कला का जादू है, और कबीर में खेल का उत्साह है। ईश्वर ने किसी भी बच्चे को एक जैसा नहीं बनाया है। हर बच्चा अपने आप में एक 'अनोखा तारा' है। जब आप अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे से करते हैं, तो आप उसकी उस ख़ास चमक को छीन लेते हैं जो कुदरत ने उसे दी है।"

यह सुनकर तीनों बच्चों के माता-पिता को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने समझ लिया कि बच्चों की तुलना करना छोड़ कर, उनके अपने पसंदीदा क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ाना ही असली परवरिश है।

कहानी की सीख:

हर बच्चा अलग है: हर बच्चे की अपनी क्षमता, प्रतिभा और गति होती है।

तुलना का नुकसान: दूसरे बच्चों से तुलना करने पर बच्चा हीनभावना का शिकार हो जाता है और अपना खुद का हुनर भी भूल जाता है।

माता-पिता की भूमिका: बच्चे को किसी और जैसा बनाने की कोशिश न करें, बल्कि वह जिस क्षेत्र में बेहतर है, उसमें उसका आत्मविश्वास बढ़ाएँ।

-----संजीवनी पाठशाला

Sanjeevni Pathshala

Nursery to Class 10 coaching in Sasaram.